दुख के सबब से मौत की आरजू न करो
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*🥀 बीमारी का बयान 🥀*
📬पोस्ट नम्बर -:: 3️⃣
*💫 हुजूर अक़दस सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम फरमाते हैं:-*
दुख के सबब से मौत की आरजू न करो।अगर नाचार हो जाओ तो कहो "खुदाया मुझे जिन्दा रख जब तक जिंदगी मेरे हक़ में बेहतर है। और मुझे वफात दे जिस वक़्त मौत मेरे हक में बेहतर हो।"
✨हां जब दीन में फितना देखे और दीनी नुक़सानात का ख़ौफ हो तो अपने मरने की दुआ जाएज़ है। हदीस में है "तुम मे से कोई मौत की आरज़ू न करे मगर जबकि भरोसा नेकी करने पर न रखता हो।"
*📚 दुर्र मुख़्तार वगैरह*
*🌟 मरीज की इयादत (बीमार की खबर पूछना) को जाना सुन्नत है। इसकी भी बड़ी फ़ज़ीलत है। कुछ हदीसें दर्ज की जाती है:-*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC
⛅ जो मुसलमान किसी मुसलमान की इयादत के लिये सुबह को जाए तो शाम तक उसके लिए सत्तर हजार फरिश्ते इस्तिगफार करते हैं। और उसके लिए जन्नत में एक बाग होगा।
🛌🏼 जब तू मरीज के पास जाए तो उससे कह की वह तेरे दुआ करे क्योंकि उस बीमार की दुआ फ़रिश्तों की दुआ के समान है।
*📚 तिर्मिज़ी व इब्ने माजा*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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