मरीज की इयादत (बीमार की खबर पूछना) को जाना सुन्नत है

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*🥀 बीमारी का बयान 🥀*



         📬पोस्ट नम्बर -:: 4️⃣

*✨मरीज की इयादत (बीमार की खबर पूछना) को जाना सुन्नत है। इसकी भी बड़ी फ़ज़ीलत है।*

*🛌🏼 मसअला:-* मरीज़ की अयादत को जाए और मर्ज़ की सख्ती को देखे तो मरीज़ के सामने यह जाहिर न करे कि तुम्हारी हालत खराब है और न इस तरह सिर हिलाये जिससे हालत खराब होना समझा जाता है। मरीज़ के सामने तो ऐसी बात करनी चाहिए जो उसके दिल को भली मालूम हो। उसका मिजाज़ पूछे और तसल्ली दे।

*📜 फायदा:-* किसी शख्स को बीमारी या ऐसी हालत में देखे जिसे पसन्द नही किया जाता तो यह दुआ पढ़े। इंशा-अल्लाह उससे महफूज रहेगा।
*اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الّذِىْ عَافَانِىِ مِمَّنْ ابْتَلَاكَ بِهٖ*

*وَفَضَّلَنِىْ عَلٰى كَثِيْرٌ مِمَّنْ خَلَقَ تَفْصِيْلًا*

*(📚बहारे शरीअत 4,हिस्सा सफा 106)*

*🌪️ मौत का वक़्त मुक़र्रर है*

🛌🏼 हर आदमी की जितनी उम्र मुकर्रर है न उससे कुछ घटे न बढ़े। आदमी लाख जतन करे जब वह मुकर्रर उम्र पूरी हो जाती है तो मलकुलमौत (मौत का फरिश्ता) यानी हज़रत इज़राइल अलैहिस्सलाम रूह कब्ज करने आते हैं और उसकी जान निकल लेते हैं। इसी का नाम मौत है।

✨ रूह कब्ज़ होने का वक़्त बहुत सख्त वक़्त है। क्योंकि इसी पर तमाम आमाल का दारोमदार है। और ईमान के तमाम नतीजे जो आख़िरत में जाहिर होंगे इसी पर मुरत्तब (आधारित) होते हैं।

*(📚बहारे शरीअत 4,हिस्सा सफा 106)*



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